शुरूआती अनुभव कैसे होते हैं?

आश्चर्य की बात नहीं कि आदमी का मन पल -पल जोखिम और रोमांच की ओर यात्रा करता है. जो बात  मायने रखती है, वह यह कि जब रोमांच यथार्थ में सामने होता है, तो उसपर आदमी की कैसी प्रतिक्रिया होती है. SLC में जब मेरे साथ यह हुआ तो मैं सोच- समझ के संसार सेContinue reading “शुरूआती अनुभव कैसे होते हैं?”

एक अधूरी मुलाक़ात

यूँ तो जीवन मे सब मग्नकुछ बंधी जंज़ीरें, पर सबमे लग्न। इस देह की अटारी पर खड़ी, हर रोज़ हूँ सोचतीक्या है ऐसा, जिसे पाने सारी दुनिया दौड़ती? क्या है दौलत, शौहरत और रुतबे की कुछ कमी?क्यों नही दिखती किसी भी दिल मे ज़रा सी नमी? ख़ुद की रूह को भी हूँ खखोलती,कुछ है ऐसाContinue reading “एक अधूरी मुलाक़ात”

अनुभूति से अभिव्यक्ति तक

मैं कौन हूँ? यह प्रश्न सुनकर मन हिंदी सिनेमा की बीती गलियों में पहुँच जाता है, जहाँ कोई चोट खाया आदमी अस्पताल के बिस्तर पर एक अरसे की बेहोशी से जागा है. वह याददाश्त खो चुका है, लेकिन उसे बोलना याद है. और इसी एक याद के सहारे वह घबराते हुए आसपास खड़े व्यक्तियों सेContinue reading “अनुभूति से अभिव्यक्ति तक”

Perfection-subset of Imperfection

Is there anything that is perfect? Isn’t it true that everything has a scope for improvement? Aren’t we all involved in some kind of process? Have we not escaped the idea of being perfect because we have accepted that it is unattainable? Take a moment and think… I was fortunate to be a part ofContinue reading “Perfection-subset of Imperfection”

Dive Into Nothingness

Always functioning but non-existent. Mindlessness is not separate from mind. SLC was created to find that mindlessness amid mind. Peace amid chaos. I was realizing that man is suffering immensely and the suffering is totally unwarranted, the suffering within family, the suffering in job, the suffering in society and so on and all this wasContinue reading “Dive Into Nothingness”